Monday, 6 February 2012

बच्चों की जिज्ञासा


पापा वहां वो रामू पटरी पे क्यों रहता है,
उसकी रगों मैं भी तो हमारे जैसा लहू बहता है,

बेटा वो गरीब है,
पापा ये गरीब शब्द कहाँ लिखा है, इसकी क्या व्याख्या है,
पापा ये गरीब कहाँ से आता है,
क्या पटरी पे पैदा होता है और पटरी पे मर जाता है,
बेटा वो अनपढ़ है,
पापा मैंने देखा है वो पढ़ पता है,
 पापा उसका भी स्कूल मैं दाखिला  करा दो,
वो भी पढ़ जायेगा, उसका भी जनम सुधर जायेगा,

बेटा ये सब भगवान् की माया है,
पापा ये कैसी माया है,
किसी  को दो वक़्त रोटी नहीं, किसी  ने पूरा देश खाया है,

बेटा ये उसका नसीब है ,
पापा हमको और उसको जिसने बनाया है,
उसी ने लिखा  नसीब है,
एक जिन्दगी की बाँहों मैं है, और एक मौत के करीब है,

 पापा तुम उसकी पीड़ा नहीं समझ पाओगे,
तुम भी औरो की तरह दो रूपये दोगे
और आगे बढ़ जाओगे,

पापा वहां वो रामू पटरी पे क्यों रहता है,
उसकी रगों मैं भी तो हमारे जैसा लहू बहता है,

***********राघव विवेक पंडित 

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