Friday, 3 February 2012

अश्क


अश्कों की कहानी इतनी पुरानी है
जितनी आसमा में चांदनी    
और समंदर में पानी है,

बेजुबान अश्क ही है 
जो हमेशा साथ रहते है 
यही तो तेरी आँखों में
ख़ुशी और गम
की निशानी है,

जब जुबान साथ नहीं देती 
अश्क सब कुछ कह जाते है,
जब तू घुट घुट के रोता है 
तब भी
ये तेरा साथ दिए जाते है,

अल्फ़ाज कम पड़ जाये 
ज़माना साथ न दे
आँखें डर से बंद हो जाये
ये न डरते है न घबराते है 
हमेशा ये बहते है 
तेरा दर्द
दुनिया को बयाँ करते है,


*******राघव विवेक पंडित**

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