Monday, 13 February 2012

क्या खूब हो

तुम्हारी जुल्फें
जैसे सेकड़ों घटाओं का समुंदर,

तुम्हारा मासूम सा चेहरा
जैसे सेकड़ों घटाओं से घिरा चाँद,

तुम्हारी आँखें
सेकड़ों अनकहे सवालों का दरिया,

तुम्हारे होठ
गुलाब की पंखुड़ियों से नाजुक

गजब की लगती हो, ये दीवाने कहते है
तेरे आगोश में चाँद सितारे रहते है,

राघव विवेक पंडित

1 comment:

  1. बहुत खूब सर!

    प्रेम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    सादर

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