Wednesday, 1 February 2012

सब की उम्मीद

जंगल में जन्नत सजाने चला है,

जानवर को आदमी बनाने चला है,



हौसले पहाड़ से बुलंद है उसके

खुद को खुदगर्जों पे मिटाने चला है,



जो न हुए कभी अपनों के अपने,

उनको ये अपना समझने लगा है,



जो है सदियों से जिन्दा लाशें,

उनमे ये जीवन जगाने चला है,



जिन्हें रक्त पिशाचों (नेताओं ) की पूजा की आदत,

उन्हें ये राम रहीम की महिमा समझाने चला है,



कुछ तो कर गुजरेगा यारों ये काम,

सबको बड़ी उम्मीदे है उससे अन्ना है नाम





*********राघव पंडित


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