Tuesday, 7 February 2012

कब आएगी

मैं गमे गिन्दगी से बेजार
पल पल तड़पता हु,
मेरा अपने जख्मों को देखना
फिर तुझे याद करना

मेरी हर कराहट पर तुम मुझे
याद आती हो,
मेरी हर चीख तुम्हे याद
करती है,

मेरे जख्मों से बहते
लहू की हर बूँद मुझे
तुम्हारी याद दिलाती है,

मुझे देख अब तो राहगीर भी
मेरे लिए दुआ करते है,

ऐ मौत
आ मुझे सकूँ दे दे
मैं तेरे आगोश में सदा सदा
के लिए
सोना चाहता हु,







 ******राघव विवेक पंडित

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