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Friday, 24 August 2012


समय के साथ
क्या क्या बदल जाता है
कल तक जो
चोर रातों को
निकलता था
वो अब दिन में निकल आता है,

चोरी के लिए
अब उसे इंतज़ार नहीं
रात होने का,
वो अब दिन दहाड़े
जनता का माल उड़ाता है,

चोर ही दरोगा है अब
हर ईमान चौकी का,
देश के चोर
अब शांतिकाल में जी रहे है,
चोरों को दरोगा
बनाने वाले
अब खून का घूंट पी रहे है,


*******राघव विवेक पंडित