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Thursday, 3 May 2012


सुबह की मीठी मीठी धूप
कडवी हो जाती है
जब सुबह के अखबार में
मासूम लोगों की
हत्या
मासूम बच्चों का
अपहरण
और
स्त्रियों पर अत्याचार की
खबर आती है,

अखबार पढ़ते पढ़ते
मुझे अपना घर
एक भयानक शहर में
नज़र आता है
और सुबह की मिठास
लगती है एक मृग मरीचिका,

आजकल अखबार में
खबर होती है शहर में
होने वाले मातम की,
नेताओं के घोटाले की,
गरीब के भूखे बच्चों के
खाली प्यालों की,
ये सब देख आसमान भी
घबराता है फिर भी
कहीं से छोटी छोटी
खुशियों के साथ
मीठी सुबह लाता है.....

*******राघव विवेक पंडित