Monday, 2 July 2012


माँ ने
आँखों में आंसू भर
बेटे को 
शहर के लिए
विदा तो किया,

लेकिन आज भी
माँ की आँखों मे
विदाई के समय की
नमी बाकी है

आज भी
घर के द्वार के
उसी कोने पर
शाम को
उसके आने का
करती है इंतज़ार,
जहां से उसने
अपने बेटे को
जी भर देख
विदा करने का
साहस किया था,


     *******राघव विवेक पंडित


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