Wednesday, 21 March 2012

दोस्ती और दर्द

मत दुखी हो मेरे दिल
जो कोई यार
दर्द दे गया,
अश्क बहा
दिल को समझा
तू कितना भी चाहे
उसे भुलाना
कभी भुला न पायेगा,

जो यार दे गया है
अश्कों का मौसम,
वही यार खुशियाँ का
मौसम भी लाएगा,
बह जायेंगे जब अश्कों में
गिले शिकवे
धुल जायेगा जब
दिल का मैल,
रात की तन्हाइयों में
जब अहसास होगा
अपनी गलतीओं का,
जब याद आयेंगे
साथ गुजारे
खट्टे मीठे लम्हे,

वो तडपेगा
मिलने को
बात करने को
तेरी एक झलक पाने को,
मीठे और कडवे लम्हों को
याद करने को,
उसे तेरी कडवी बातों में भी
अपनेपन की आएगी महक,

तेरी भी जुबान पे
उसके लिए होगी
कडवाहट,
लेकिन दिल में होगी
नन्ही सी प्यार भरी
सुगबुगाहट,
तू चाहकर भी अपनी
तड़प छुपा न पायेगा
जुबान से लेगा तू
किसी और का नाम
और उसका नाम
जुबान पर आएगा,

तुम्हारी यही तड़प तुम्हे
एक दिन मिलाएगी
जुबान खामोश रहेगी
और आँखें
अश्कों से भर जायेगी,

सारे गिले शिकवे
अश्कों में बह जायेंगे
और हाथ गले मिलने को
उठ जायेंगे,

(छोटी से जिन्दगी में हम लोगों को लड़ाई का समय कहाँ से मिल जाता है
जबकि हम लोगों के पास इस रोजी रोटी की भागदौड़ में अपने
माँ बाप बीवी और बच्चों से प्यार से बात करने और उन्हें समझने का
समय नहीं होता, शायद हममे ही कोई कमी है)

 *******राघव विवेक पंडित

No comments:

Post a Comment