Friday, 16 March 2012

कर्म क्षेत्र


राम की धरती पे
रावण का पहरा  
कुरुक्षेत्र में
शाम और 
लंका में सवेरा 

युद्ध क्षेत्र सा पूरा
शहर नज़र आता है
कोई रोटी
कोई पानी
कोई सत्ता के लिए
रहा है  लड़,  
पाप का पेड़
दिनोंदिन रहा है  बढ़, 

एक इंसान
धरती पुत्र किसान
दूर कहीं बैठा  
चिंतित
लेकिन शांत
चेहरे पे एक पल में सेकड़ों भाव
न किसी से लड़ाई न दुश्मनी
सिर्फ इंतज़ार
बारिश का
चिंता है तो बस
कहीं सुखा न पड़ जाये,
मैं और 
मेरा शहर वाला भाई 
भूखा न मर जाये,

एक मानवीय 
विचारों में लीन,
एक मानवीय 
विचारों से विहीन,


           *******राघव विवेक पंडित 

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